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ढाबों में बिक रही शराब से शर्मसार हुआ शहर, आबकारी विभाग मौन

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औद्योगिक क्षेत्र के रूप में पहचान बना चुका जिला आज शराबखोरी की काली सच्चाई से जूझ रहा है। नगर और आसपास के क्षेत्रों में संचालित सैकड़ों ढाबों में खुलेआम देशी और विदेशी शराब परोसी जा रही है। छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से मंगाए गए विभिन्न ब्रांड की शराब इन ढाबों में धड़ल्ले से बिक रही है – वह भी बिना किसी वैधानिक लाइसेंस के।

ढाबा संचालकों में यह मानसिकता घर कर चुकी है कि यदि वे शराब नहीं बेचेंगे, तो ग्राहक नहीं आएंगे। नतीजा यह है कि जो ढाबे शराब परोसने से इंकार करते हैं, वहां ग्राहक ही नहीं पहुंचते। इसके उलट, शराब परोसने वाले ढाबों में देर रात तक भीड़, नशे और बवाल का माहौल बना रहता है।
परिवारों का भोजन करना हुआ दूभर
इन ढाबों की हालत यह हो चुकी है कि कोई भी संभ्रांत नागरिक या परिवार अब यहां भोजन करने का साहस नहीं कर पाता। शाम ढलते ही माहौल अशोभनीय हो जाता है – गाली-गलौज, नशे में धुत लोग, बेतरतीब व्यवहार आम हो गया है।
सीसीटीवी में कैद होती है सारी करतूत
चौंकाने वाली बात यह है कि कई ढाबों में सीसीटीवी कैमरे (तीसरा नेत्र) भी लगे हैं, जिनमें शराब परोसने, ग्राहकों के विवाद और अन्य आपत्तिजनक गतिविधियों की पूरी रिकॉर्डिंग होती है। लेकिन ये फुटेज कभी अधिकारियों के पास नहीं पहुंचते और स्थानीय मिलीभगत के कारण सब कुछ ‘मैनेज’ कर लिया जाता है।
महुआ शराब पर कार्यवाही, ब्रांडेड शराब पर चुप्पी
आबकारी विभाग की भूमिका इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। विभाग केवल महुआ शराब की तस्करी पकड़कर कार्यवाही का दिखावा करता है, जबकि ब्रांडेड शराब की खुलेआम बिक्री पर पूरी तरह मौन है। यह स्पष्ट करता है कि या तो विभाग की मिलीभगत है या फिर लापरवाही की पराकाष्ठा।
कानून की अनदेखी, शासन की साख पर दाग
छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम का घोर उल्लंघन इन ढाबों में हो रहा है। लाइसेंस न होना, नियमों की धज्जियाँ उड़ाना और सार्वजनिक स्थलों पर शराब परोसना गंभीर अपराध है। बावजूद इसके स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग की चुप्पी से बड़ा सवाल खड़ा होता है – आखिर इन्हें संरक्षण कौन दे रहा है ।
जनता में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग
बलौदा बाजार नगरवासियों में गहरी नाराजगी है। वे मांग कर रहे हैं कि इन ढाबों पर सघन जांच की जाए, सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जाए और अवैध शराब बिक्री पर कठोर कार्रवाई हो। यदि प्रशासन ने जल्द ही इस गंभीर समस्या पर अंकुश नहीं लगाया, तो यह न केवल सामाजिक ताना-बाना बिगाड़ेगा, बल्कि कानून व्यवस्था को भी खुली चुनौती होगी।

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