कवर्धा/पंडरिया।
कबीरधाम जिले की सड़कों पर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आए दिन हो रहे सड़क हादसे अब प्रशासन और पुलिस की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। कभी गाय और मवेशियों का जमघट, तो कभी टूटी और खस्ताहाल सड़कें—हर दिन किसी न किसी की जान ले रही हैं।
पूर्व में पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह ने हेलमेट को अनिवार्य करते हुए सख्त मुहिम चलाई थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह ढीले पड़ गए हैं। न चेकिंग है, न नियमों का पालन। नतीजा यह कि सड़क पर न हेलमेट दिखते हैं, न पुलिस का डर।

सड़क किनारे संचालित शराब दुकानों ने दुर्घटनाओं को और बढ़ा दिया है। शराब के नशे में वाहन चलाने वाले अब न सिर्फ अपनी बल्कि दूसरों की जान के लिए भी खतरा बन चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में सड़कों की स्थिति बेहद खराब है—गड्ढे अब मौत के गड्ढों में तब्दील हो गए हैं।
हादसों के बढ़ते कारण:
1️⃣ सड़क किनारे मवेशियों की भरमार
2️⃣ गड्ढों से भरी टूटी सड़कें
3️⃣ रोड किनारे खुली शराब दुकानें
4️⃣ हेलमेट और सीटबेल्ट नियमों की अनदेखी
5️⃣ पुलिस की कमजोर कार्यवाही और चेकिंग व्यवस्था
6️⃣ शराब पीकर वाहन चलाने पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं
हर हादसे के बाद जांच और मुआवजे की औपचारिकता निभाई जाती है, लेकिन सड़क सुरक्षा के ठोस उपायों पर अमल नहीं हो रहा। नतीजा—कबीरधाम की सड़के खून से लाल हो रही हैं और जिंदगी सस्ती होती जा रही है।



