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एकीकृत बाल विकास परियोजना चिल्फी में नियमो की अनदेखी करते हुए किया खरीदी फ्लेक्सी फंड की खरीदी में अनियमितता

कवर्धा, एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी चिल्फी द्वारा सारी नियमो को ताक में रखकर आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए फ्लेक्सी फंड में सामग्री की खरीदी किया गया है । 15फरवरी के बाद खरीदी पर वित्त विभाग की अनुमति लेना होता है लेकिन इनके द्वारा 28फरवरी को बैठक आयोजित करते हुए 22मार्च को सामग्री की खरीदी किया गया है साथ ही क्रय समिति का गठन में भी गड़बड़ी किया गया है ।
क्रय समिति गठन में गड़बड़ी
विभाग में कोई भी सामग्री का क्रय करने के लिए लेखा से संबंधित जानकार अधिकारी को समिति में रखना होता है । एकीकृत बाल विकास परियोजना चिल्फी में क्रय समिति का गठन में जनपद पंचायत , खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लेखा अधिकारी को समिति में शामिल करना था लेकिन परियोजना अधिकारी के द्वारा अपने अधीनस्थ तीनो पर्यवेक्षक ,सहायक ग्रेड दो के लिपिक और स्वयं क्रय समिति में शामिल होकर आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए शासन से छः सौ रुपए प्रति केंद्र के मान से निन्यानबे हजार की राशि का आबंटन प्राप्त हुआ था जिसकी खरीदी किया गया है । समिति गठन में गड़बड़ी से ही अनियमितता होने की आभास होता है ।
15फरवरी के बाद क्रय पर प्रतिबंध बावजूद खरीदी
राज्य सरकार द्वारा मार्च क्लोजिंग के चलते सभी प्रकार की खरीदी पर 15फरवरी के बाद प्रतिबंध लगा दिया जाता है । यदि आवश्यक सामग्री की खरीदी करना होता है तो वित्त विभाग से अनुमति लेना होता है लेकिन परियोजना अधिकारी चिल्फी के द्वारा 22फरवरी को क्रय समिति की बैठक आयोजित कर संचनालय से प्राप्त पत्र का हवाला देते हुए फ्लेक्सी फंड की राशि का निविदा आमंत्रित करने का प्रस्ताव सहमति से पारित किया गया तत्पश्चात 14मार्च को समिति का पुनः बैठक आयोजित कर प्राप्त निविदा का तुल्यात्मक अध्ययन कर रूपेश कुमार, मुकेश कुमार की दुकान से सामग्री क्रय करने के लिए आदेश जारी करने का निर्णय लिया गया । रमेश कुमार, मुकेश कुमार के द्वारा 22मार्च को समान सप्लाई किया गया। है ।
बिना क्रमांक के बिल से फ्लेक्सी फंड का भुगतान
एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी चिल्फी के द्वारा सारी नियमो को ताक में रखकर सामग्री का क्रय तो कर लिया । रमेश कुमार, मुकेश कुमार किराना एवम जनरल स्टोर चिल्फी घाटी जिला कबीरधाम को निन्यानबे हजार रुपए का भुगतान किया गया है ।उक्त बिल में जी एस टी नंबर तो लिखा हुआ है लेकिन नियमानुसार निर्धारित बिल का प्रारूप नही है जिस पर एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी ने भुगतान किया है वह दुकान का लेटर पैड है जिसमे बिल क्रमांक ही नही लिखा है । 
जांच की आवश्यकता
एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी के पदस्थापना दिवस से लेकर अबतक जितना भी सामग्री का क्रय और भुगतान किया गया है उसका सूक्ष्मता से जांच पड़ताल करने पर अनेकों गड़बड़ी उजार होने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता ।

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