नकली शंकराचार्य के विरोध में आदित्यवाहिनी द्वारा चलाए गए अभियान को मिली सफलता के बाद रविवार को धर्मसंघ पीठ परिषद, आदित्यवाहिनी एवं आनंदवाहिनी की ओर से एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई और प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को सहयोग के लिए धन्यवाद प्रकट किया गया।
प्रेस वार्ता में आदित्यवाहिनी के प्रदेश उपाध्यक्ष अवधेश नंदन श्रीवास्तव और जिला अध्यक्ष आशीष दुबे ने बताया कि दुर्ग जिले के सुरडुंग-जामुल में आयोजित रुद्र महायज्ञ में आयोजन समिति ने एक फर्जी व्यक्ति स्वामी अधोक्क्षजानंद तीर्थ को श्री गोवर्धन मठ, पुरी पीठ के शंकराचार्य के रूप में आमंत्रित किया था। आदित्यवाहिनी ने इसका कड़ा विरोध करते हुए शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और जामुल थाने में शिकायत दर्ज कराई।
राज्यभर के सनातन धर्म अनुयायियों के व्यापक विरोध के चलते आयोजन समिति को यह स्वीकार करना पड़ा कि उन्हें इस व्यक्ति की प्रामाणिकता की जानकारी नहीं थी, और अब उन्होंने स्वामी अधोक्क्षजानंद तीर्थ को कार्यक्रम से अलग होने का आग्रह किया, जिसे उन्होंने स्वीकार भी कर लिया।
श्री श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि भले ही अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, परंतु आदित्यवाहिनी की मांग है कि नकली शंकराचार्यों पर सख्त कार्यवाही हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए कानून बनाया जाए। उन्होंने कहा कि उच्च एवं उच्चतम न्यायालयों द्वारा श्री निश्चलानंद सरस्वती जी को श्रीमद्जगतगुरु शंकराचार्य के रूप में मान्यता प्राप्त है और उनके अभिषेककर्ता ब्रह्मलीन स्वामी श्री निरंजन देवतीर्थ जी महाराज रहे हैं।
उन्होंने अधोक्क्षजानंद तीर्थ को स्वयंभू और अराजक बताते हुए कहा कि वह सनातन धर्म की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं, अतः उन पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए।
प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व जिला अध्यक्ष मारुतिशरण शर्मा, कमलकांत रुसिया, नारायण गुप्ता, शिव अग्रवाल, मोनू ठाकुर सहित अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
अंत में जिला अध्यक्ष आशीष दुबे ने मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस अभियान में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।