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शक्कर कारखाने के निजीकरण के विरोध में श्रमिकों का प्रदर्शन तेज

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श्रमिक कल्याण संघ ने सौंपा ज्ञापन, निजीकरण पर रोक की मांग, किसानों के बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया
कवर्धा , देश और प्रदेश में उत्कृष्ट शुगर उत्पादन के लिए पहचान बना चुके पंडरिया शक्कर कारखाने के निजीकरण की चर्चाओं ने श्रमिकों और किसानों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। इसी कड़ी में सोमवार को श्रमिक कल्याण संघ के प्रतिनिधिमंडल ने कारखाना प्रबंध संचालक को ज्ञापन सौंपते हुए निजीकरण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

श्रमिक कल्याण संघ ने अपने ज्ञापन में कहा है कि कारखाना महज 9 वर्ष पूर्व शुरू हुआ था और इतने कम समय में ही इसे निजी हाथों में सौंपने की कवायद शुरू कर दी गई है, जो न सिर्फ निंदनीय है, बल्कि श्रमिकों और किसानों के हितों के साथ भी खुला धोखा है। ज्ञापन में बताया गया कि कारखाने की स्थापना का उद्देश्य युवाओं को रोजगार और किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाना था, किंतु अब इन्हीं युवाओं को बेरोजगारी की ओर और किसानों को आर्थिक संकट की ओर धकेला जा रहा है।
संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समय रहते शासन-प्रशासन निजीकरण की प्रक्रिया पर विराम नहीं लगाता है, तो समस्त श्रमिक जल्द ही उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही प्रशासन और कारखाना प्रबंधन की होगी।
इस दौरान संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कारखाने द्वारा किसानों का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है, जिससे किसानों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बकाया राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।
ज्ञापन सौंपने के दौरान श्रमिक कल्याण संघ के अध्यक्ष रमाशंकर विश्वकर्मा, सचिव अजय बंजारे, कोषाध्यक्ष सत्यप्रकाश मानिकपुरी, संयुक्त सचिव मेलन दास मानिकपुरी एवं सदस्य संतराम वर्मा, बिसेन साहू, अश्वनी साहू, जागेश्वर कुर्रे और वीरेंद्र साहू उपस्थित रहे।

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