कबीरधाम ज़िले के सहसपुर लोहारा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बड़ौदा खुर्द में एक हृदयविदारक घटना ने पूरे गाँव को झकझोर कर रख दिया है। खेत की सुरक्षा के लिए लगाए गए बिजली करंट की चपेट में आकर एक पशु और एक वन्य प्राणी—बंदर की मौके पर ही मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि एक किसान ने जंगली जानवरों से फसल को बचाने के उद्देश्य से खेत के चारों ओर बिजली का प्रवाह कर दिया था। दुर्भाग्यवश, एक बेजुबान मवेशी और एक बंदर, जिसे हिंदू समाज में हनुमान जी का रूप माना जाता है, इस जानलेवा जाल में फँस गए और मौके पर ही उनकी जीवन लीला समाप्त हो गई।
गाँव में इस घटना के बाद भारी आक्रोश का माहौल है। बंदर की मौत ने ग्रामीणों की धार्मिक भावना को गहरी चोट पहुँचाई है, क्योंकि यह केवल एक जानवर नहीं बल्कि श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीणों ने इसे न सिर्फ एक दुर्घटना, बल्कि धार्मिक भावनाओं का अपमान करार दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही और प्रशासन की अनदेखी के कारण ऐसी घटनाएँ घट रही हैं। खेतों की सुरक्षा के नाम पर इस प्रकार की खुली बिजली व्यवस्था न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि मानवता और आस्था के खिलाफ भी है।
जिम्मेदार कौन
अब बड़ा सवाल यह है कि इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या बिजली विभाग ने ऐसे अवैध कनेक्शन पर कभी नजर डाली? क्या प्रशासन ने किसानों को वैकल्पिक उपाय सुझाए ।
ग्रामीणों की माँग है कि दोषी किसान पर सख्त कार्रवाई हो, और बिजली विभाग की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही, प्रशासन से यह भी माँग की जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों, इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए और सुरक्षित फसल सुरक्षा उपायों को प्रोत्साहित किया जाए।
यह घटना केवल दो बेजुबानों की मौत नहीं, बल्कि आस्था, संवेदना और जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्न है। जब फसल सुरक्षा के नाम पर जानवरों की बलि दी जाने लगे, तो समाज और प्रशासन दोनों को आत्मचिंतन करना होगा।