कवर्धा। जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित, कवर्धा द्वारा संचालित तेंदूपत्ता खरीदी अभियान में इस वर्ष कबीरधाम जिले ने शानदार उपलब्धि हासिल की है। 14 मई 2025 की स्थिति में जिले की 19 समितियों के अंतर्गत संचालित 269 फड़ों के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य किया जा रहा है।
इस वर्ष जिले को 40100 मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। 7 मई से प्रारंभ इस अभियान में अब तक 90.75% यानी 34457.753 मानक बोरा संग्रहित किया जा चुका है। 28342 संग्राहकों ने इस कार्य में भागीदारी की है और उन्हें संग्रहण पारिश्रमिक के रूप में रु. 20,01,42,322.50 की राशि भुगतान योग्य है।
वनवासियों को आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता
तेंदूपत्ता खरीदी से कबीरधाम के वनवासी परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिला है। यह कार्य उनके लिए केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर जीवन की ओर एक बड़ा कदम है। आनलाइन पारिश्रमिक से वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति कर पा रहे हैं, जिससे उनके जीवन स्तर में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है।
शासन की योजनाएं बनीं सहारा
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वनवासियों के हित में चलाई जा रही योजनाएं इस अभियान को और भी प्रभावी बना रही हैं, जैसे:तेंदूपत्ता संग्राहक पारिश्रमिक वृद्धि योजना, जिससे संग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक भुगतान मिल रहा है, वनाधिकार पट्टा योजना, जिसके तहत वन भूमि पर उन्हें मालिकाना हक प्राप्त हो रहा है, लघु वनोपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना, जिससे बाजार की अनिश्चितता से सुरक्षा मिलती है, प्रधानमंत्री वनधन योजना, जिसमें मूल्य संवर्धन, प्रशिक्षण और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध हैं, तथा वनवासी कल्याण योजनाएं, जो स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और आजीविका जैसे क्षेत्रों में सहायता प्रदान करती हैं।
सशक्त वनवासी, समृद्ध भविष्य
कबीरधाम जिले में चल रहा यह तेंदूपत्ता संग्रहण अभियान वनवासी समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है। शासन और स्थानीय संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी, सुचारु और समयबद्ध हो, ताकि वनवासी समय पर अपना मेहनताना प्राप्त कर सकें।
कबीरधाम में यह अभियान
वनविकास और वनवासी कल्याण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है, जिससे वनांचल में समृद्धि और संतुलित विकास की नींव मजबूत हो रही है।