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कबीरधाम में वन्यजीवों का नरसंहार: पंचायत सरपंच पर बंदरों की हत्या का आरोप”

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कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोसमंदा से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। आरोप है कि गांव के वर्तमान सरपंच दीनदयाल साहू के नेतृत्व में एक अज्ञात व्यक्ति को बुलाकर दर्जनों वन्यजीव बंदरों को गोली मारकर मौत के घाट उतारा गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बंदरों के शवों को न केवल गांव में फेंका गया, बल्कि कुछ शवों को लोगों के मल-मूत्र में भी फेंका गया, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
गौ सेवक जीव सेवक संघ के सदस्य हरीश चौहान द्वारा वन विभाग को दी गई शिकायत में यह बताया गया है कि अब तक सात बंदरों के शव बरामद हो चुके हैं। कुछ शवों को कुत्तों ने खा लिया जबकि कुछ गांव के आसपास क्षत-विक्षत अवस्था में पड़े हुए हैं।
इस अमानवीय कृत्य के विरुद्ध चौहान ने कठोर कार्यवाही की मांग की है। उनका कहना है कि यह न केवल वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानवीय मूल्यों पर भी बड़ा हमला है।
कानूनी प्रावधान एवं संभावित कार्यवाही:
1. भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत:
अनुसूची-2 में शामिल बंदरों की हत्या गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।
दोष सिद्ध होने पर 3 से 7 वर्ष तक की सजा तथा 25,000 रुपये या अधिक जुर्माना हो सकता है।
2. भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 428 और 429:
जानवरों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने या मारने पर 2 से 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान।
3. वन (संरक्षण) अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम:
वन क्षेत्र या उसके निकट ऐसे कृत्य करने पर अतिरिक्त कानूनी धाराएं भी लागू हो सकती हैं।
4. पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत:
सरपंच पद का दुरुपयोग कर गैरकानूनी कार्य में शामिल होने पर पद से निलंबन या बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हो सकती है।
जनता से अपील की जाती है कि वे ऐसे क्रूर और अवैध कृत्यों की सूचना तत्काल संबंधित वन विभाग या पुलिस को दें। वन्यजीवों की रक्षा हमारी नैतिक, कानूनी और पर्यावरणीय जिम्मेदारी है।

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