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बिना डॉक्टर के चल रहा पांडातराई अस्पताल, घायल मरीज रेफर होने को मजबूर

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10 महीनों से खाली पड़ा डॉक्टर का पद, 10 हजार की आबादी और 20 गांवों की स्वास्थ्य जिम्मेदारी एक आरएमए के भरोसे
पांडातराई
प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर करती एक गंभीर तस्वीर पांडातराई के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई है, जहां पिछले 10 महीनों से डॉक्टर का पद खाली पड़ा है। करीब दस हजार की आबादी और बीस गांवों की जिम्मेदारी संभाल रहा यह अस्पताल वर्तमान में सिर्फ एक आरएमए और सीमित स्टाफ के भरोसे चल रहा है।
डॉक्टर और स्टाफ की कमी के कारण मौसमी बीमारियों से पीड़ित ग्रामीणों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। स्थिति इतनी बदतर है कि दुर्घटना में घायल मरीजों को तुरंत कवर्धा या पंडरिया रेफर करना पड़ता है, जिससे कई बार जान पर बन आती है। शवों का पोस्टमार्टम तक पंडरिया ले जाना पड़ता है। मारपीट या आपात स्थितियों में डॉक्टरी जांच तक नहीं हो पाती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पांडातराई नगर पंचायत बनने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। एक नया भवन तैयार तो हुआ, लेकिन सुविधाएं, संसाधन और स्टाफ आज तक नहीं मिल सके। अस्पताल को अब ‘रेफरल सेंटर’ कहा जाने लगा है, क्योंकि यहां इलाज के बजाय केवल रेफर किया जाता है।
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते जनता अब प्राइवेट अस्पतालों का रुख करने को मजबूर है। ग्रामीणों की मांग है कि पांडातराई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की नियुक्ति और स्टाफ की तैनाती तत्काल की जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर ही लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

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