कवर्धा,
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत गरीबों को पक्की छत दिलाने की दिशा में भले ही सरकार प्रतिबद्ध हो, लेकिन कबीरधाम जिले के आंकड़े हकीकत की सच्चाई कुछ और ही बयां कर रहे हैं। जिले के सात नगरीय निकायों में से कई निकायों में आवास निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है, तो कुछ में काम की शुरुआत ही नहीं हुई है।
जिले में इस योजना के तहत कुल 8445 आवास स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन अब तक केवल 6209 आवास ही पूर्ण हो पाए हैं। शेष करीब 2236 आवास या तो निर्माणाधीन हैं या पूरी तरह ठप पड़े हुए हैं। खास बात यह है कि कई आवास फाउंडेशन, लिंटर और छत जैसे प्रारंभिक चरणों तक ही सिमटे हैं, जो योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
निकायवार स्थिति पर एक नजर:
नगर पंचायत इंदौरी – सबसे खराब प्रदर्शन
स्वीकृत आवास: 0
पूर्ण आवास: 0
योजना के तहत कोई कार्य शुरू ही नहीं हुआ।
PMAY 2.0 में भी केवल 23 स्वीकृति, कार्य लंबित।
नगर पालिका परिषद पंडरिया – सबसे अधिक अधूरे आवास
स्वीकृत: 2385
पूर्ण: 1893
फाउंडेशन: 228
लिंटर: 163
छत: 54
कुल निर्माणाधीन: 445
अपूर्ण: 43 प्रकरण DPR शासन को भेजे गए
नगर पंचायत बोड़ला – आदिवासी क्षेत्र में योजना की धीमी रफ्तार
स्वीकृत: 1287
पूर्ण: 1028
फाउंडेशन: 170
लिंटर: 56
छत: 33
निर्माणाधीन: 259
DPR अपडेट: 59 प्रकरण शासन को भेजे गए
नगर पालिका परिषद कवर्धा – जिला मुख्यालय की चिंताजनक तस्वीर
स्वीकृत: 1466
पूर्ण: 1277
फाउंडेशन: 12
लिंटर: 16
छत: 30
निर्माणाधीन: 58
DPR भेजी गई: 131 प्रकरण
नगर पंचायत पंडातराई – लक्ष्य से काफी पीछे
स्वीकृत: 1586 पूर्ण: 407 , फाउंडेशन: 75 , लिंटर: 32
छत: 32निर्माणाधीन: 139 , अपूर्ण: 40
नगर पंचायत सहसपुर लोहारा
स्वीकृत: 848 , पूर्ण: 778 , फाउंडेशन: 46 , लिंटर: 15 , छत: 5 ,निर्माणाधीन: 66 ,अपूर्ण: 4
नगर पंचायत पिपरिया
स्वीकृत: 873 , पूर्ण: 826 , फाउंडेशन: 22 , लिंटर: 8 , छत: 12 , निर्माणाधीन: 42 , अपूर्ण: 5
जिले का कुल प्रदर्शन – आंकड़ों की जुबानी
कुल स्वीकृत आवास: 8445 पूर्ण: 6209 , फाउंडेशन स्तर पर: 553 , लिंटर स्तर पर: 290, छत स्तर पर: 166
कुल निर्माणाधीन: 1009
निर्माण शुरू ही नहीं हुआ: 286
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का हाल
नई योजना PMAY 2.0 के तहत भी प्रगति शून्य है।
कवर्धा: 103 स्वीकृत, लेकिन जमीन पर कोई कार्य नहीं
इंदौरी: 23 स्वीकृत, कार्य लंबित
कुल: 126 आवास, सभी DPR स्तर पर अटके
बड़ी चिंता:
ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में सबसे अधिक आवास अधूरे, जबकि इन्हीं इलाकों के लिए योजना सबसे ज्यादा जरूरी थी लंबित DPR, प्रशासनिक शिथिलता को उजागर करते हैं
इंदौरी जैसे निकाय में पूरी तरह निष्क्रियता, योजनाओं के प्रति उदासीन रवैये की मिसाल अधूरे निर्माण से लाभार्थी परेशान, वर्षों से इंतजार में बैठे हैं लोग प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सरकार की मंशा स्पष्ट है, लेकिन स्थानीय प्रशासनिक अमले की लापरवाही और सुस्ती योजना के उद्देश्यों को धूमिल कर रही है। शासन को चाहिए कि जिन निकायों में कार्य शून्य है या धीमी रफ्तार से चल रहा है, वहां उत्तरदायित्व तय कर कार्रवाई की जाए। योजना का लाभ वास्तविक पात्रों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए मॉनिटरिंग सिस्टम को और मजबूत करना जरूरी है।

(उक्त आंकड़ा 6 जून 2025 की स्थिति में )






