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मौत के सौदागर: झोलाछाप डॉक्टरों का साम्राज्य, प्रतिबंधित दवाइयों से इलाज और गर्भपात तक का धंधा”

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कवर्धा , जिले के मैदानी इलाकों से लेकर वनांचल तक झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क खतरनाक रूप से फैल चुका है। बिना किसी मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के ये कथित डॉक्टर ग्रामीणों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।
कहीं इंजेक्शन और एंटीबायोटिक की मनमानी डोज दी जा रही है, तो कहीं प्रतिबंधित दवाइयों का खुला उपयोग हो रहा है। यही नहीं, कई झोलाछाप डॉक्टर अब गुप्त गर्भपात कराकर न केवल कानून तोड़ रहे हैं, बल्कि महिलाओं की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
प्रतिबंधित दवाइयों का खेल
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कई झोलाछाप डॉक्टर गांवों में खुलेआम “हाई पावर” एंटीबायोटिक, स्टेरॉइड, हार्मोन इंजेक्शन और प्रतिबंधित गर्भनिरोधक दवाइयां दे रहे हैं।
ये दवाइयां मेडिकल साइंस के मानकों के अनुसार केवल विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा नियंत्रित परिस्थितियों में दी जा सकती हैं, लेकिन कबीरधाम के कई हिस्सों में यह दवाइयां दुकानों की आड़ में धड़ल्ले से बेची और लगाई जा रही हैं।
अवैध गर्भपात का कारोबार
कई ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टर महिलाओं का “इलाज” करने के नाम पर अवैध तरीके से गर्भपात कर रहे हैं। न तो इनके पास लाइसेंस है, न ही किसी प्रकार की चिकित्सकीय सुविधा — न एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, न संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था।
फलस्वरूप कई मामलों में भारी रक्तस्राव, संक्रमण और यहां तक कि महिलाओं की मौत जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
फिर भी विभागीय अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।
मिलीभगत का संदेह
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मचारियों की मौन सहमति या मिलीभगत के कारण झोलाछापों का यह धंधा फल-फूल रहा है।
कई जगह तो सरकारी स्वास्थ्य उपकेंद्र के पास ही झोलाछाप क्लिनिक खुले हैं, जो प्रशासन की लापरवाही को उजागर करते हैं।
कानूनी स्थिति
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम (NMC Act 2023) और गर्भपात अधिनियम (Medical Termination of Pregnancy Act 1971, संशोधित 2021) के तहत बिना पंजीयन चिकित्सा कार्य या बिना अनुमति गर्भपात कराना संज्ञेय अपराध है,
जिसमें दोषी पाए जाने पर 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
फिर भी कबीरधाम जिले में इन कानूनों का पालन नाममात्र का है।
जनता के स्वास्थ्य से बड़ा मजाक
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों, एएनएम, एमपीडब्ल्यू, और आशा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बावजूद झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार एक गहरी प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है।
गांवों में “ठेका आधारित इलाज” की नई प्रथा शुरू हो चुकी है—मासिक शुल्क देकर मरीज इलाज कराते हैं, चाहे बीमारी कोई भी हो।
कई जगह ये झोलाछाप मेडिकल स्टोर की आड़ में क्लिनिक चलाकर खुद को “डॉक्टर साहब” कहलवा रहे हैं।
सवाल और जनअपील
कबीरधाम जिले में स्वास्थ्य विभाग आखिर कब जागेगा?
क्या किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार है ताकि कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जा सके।
कबीरधाम जिले के नागरिकों से अपील है कि वे ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के पास इलाज न कराएं।
स्वास्थ्य विभाग से भी अपेक्षा है कि वह तत्काल जिलेभर में अभियान चलाकर बिना पंजीयन चिकित्सा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई, एफआईआर दर्ज करे और लाइसेंसविहीन मेडिकल स्टोर्स की जांच करवाए।

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