महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संवैधानिक संशोधन, 2023) को लेकर क्षेत्र में सकारात्मक वातावरण निर्मित हुआ है। जनपद पंचायत कवर्धा की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा गणपत बघेल ने इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर बताया है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह निर्णय केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के आत्मसम्मान, समान अधिकार और नेतृत्व क्षमता को संवैधानिक मान्यता देने वाला कदम है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीति निर्माण की प्रक्रिया अधिक संवेदनशील और समावेशी बनेगी। इससे समाज के हर वर्ग की अपेक्षाओं को बेहतर ढंग से अभिव्यक्त करने का अवसर मिलेगा।
श्रीमती बघेल ने कहा कि देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका देना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। 33 प्रतिशत आरक्षण से महिलाओं को नेतृत्व के नए अवसर प्राप्त होंगे और वे शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सुरक्षा एवं सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा सकेंगी। इससे आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूती मिलेगी।
उन्होंने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए देशभर की माताओं-बहनों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल आने वाले समय में भारतीय राजनीति की तस्वीर बदलने का सामर्थ्य रखती है। यह कदम नई पीढ़ी की बेटियों को सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखेगा।
कुल मिलाकर, नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला नेतृत्व को नई ऊर्जा देने वाला निर्णय सिद्ध हो रहा है, जो लोकतंत्र को अधिक संतुलित, सहभागी और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ता है।