जिले में बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए भाटापारा और सिमगा विकासखंड के दो अलग-अलग गांवों में नाबालिगों की शादी रुकवा दी। संयुक्त टीम की त्वरित कार्रवाई से न सिर्फ एक सामाजिक अपराध टला, बल्कि परिजनों को स्पष्ट कानूनी चेतावनी भी दी गई।
पहला मामला भाटापारा विकासखंड का है, जहां सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई, महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस तथा चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम मौके पर पहुंची। दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि बालिका की उम्र महज 15 वर्ष तथा युवक की उम्र 20 वर्ष 10 माह है। दोनों ही वैधानिक विवाह आयु से कम पाए गए। स्पष्ट है कि यह विवाह बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 का प्रत्यक्ष उल्लंघन था। अधिनियम के अनुसार लड़की की न्यूनतम वैवाहिक आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। कानून की धारा 9, 10 एवं 11 के तहत बाल विवाह करवाने, प्रोत्साहित करने या उसमें सहयोग करने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
दूसरा मामला सिमगा विकासखंड का है, जहां एक अन्य नाबालिग बालिका का विवाह कराया जा रहा था। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर आयु संबंधी प्रमाणों की जांच की और विवाह को तत्काल प्रभाव से रुकवाया। दोनों मामलों में परिजनों एवं ग्राम के जिम्मेदार व्यक्तियों को स्पष्ट रूप से अवगत कराया गया कि बाल विवाह दंडनीय अपराध है और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई के दौरान पंचनामा तैयार कर संबंधित पक्षों से लिखित आश्वासन लिया गया। अधिकारियों ने यह भी रेखांकित किया कि बाल विवाह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह बालिकाओं के शिक्षा, स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों का हनन है। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 तथा भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराएं भी ऐसे मामलों में लागू हो सकती हैं।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गांव स्तर पर निगरानी बढ़ाने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और स्कूल प्रबंधन समितियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले तो तत्काल संबंधित विभाग या पुलिस को सूचित करें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।