छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलवाद की समाप्ति की घोषणा के बाद कवर्धा शहर ऐतिहासिक उत्सव का साक्षी बना। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च को सदन में नक्सलवाद के अंत की घोषणा के पश्चात प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर उल्लास का माहौल है। इसी क्रम में उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा के पहली बार अपने विधानसभा क्षेत्र कवर्धा आगमन पर महामाया चौक में अभूतपूर्व नागरिक अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया।
ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और नारों के बीच हजारों नागरिकों ने अपने ‘माटी पुत्र’ का स्वागत किया। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर स्वागत मंच सजाए गए थे। विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज प्रमुखों ने फूल-मालाओं से स्वागत करते हुए उप मुख्यमंत्री को लड्डुओं से तौलकर सम्मानित किया। यह दृश्य राजनीतिक कार्यक्रम से अधिक जन-उत्सव में तब्दील नजर आया।
उप मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह जीत किसी एक नेता या सरकार की नहीं, बल्कि जनभागीदारी, सुरक्षा बलों के साहस और बस्तरवासियों के अटूट विश्वास की जीत है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चार दशकों से छत्तीसगढ़ विशेषकर बस्तर अंचल नक्सली हिंसा की त्रासदी झेल रहा था। निर्दोष ग्रामीणों, जवानों, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने हिंसा का दंश सहा। स्कूलों और सड़कों तक को बारूद से उड़ाने की साजिशें रची गईं।
उन्होंने माओवाद को “आयातित विचारधारा” करार देते हुए कहा कि लोकतंत्र में बंदूक की राजनीति का कोई स्थान नहीं है। आज स्थिति बदल चुकी है। गांवों में मेले लग रहे हैं, बाजारों में रौनक लौटी है और लोग भयमुक्त होकर जीवन जी रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने हथियार छोड़ने वालों के पुनर्वास के लिए सकारात्मक नीति अपनाई, जिससे मुख्यधारा में वापसी का रास्ता खुला।
कार्यक्रम में ब्राह्मण, यादव, ठाकुर, कुर्मी, साहू, सतनामी, गोंड, जैन, वैष्णव सहित अनेक समाजों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिला प्रेस क्लब, विभिन्न व्यापारिक संगठनों, युवा क्लबों और खेल संघों की भी सक्रिय भागीदारी रही। शहर में जुलूस के दौरान देशभक्ति के गीत और “भारत माता की जय” के नारे गूंजते रहे।
उप मुख्यमंत्री ने गायत्री मंदिर और गुरुद्वारे में जाकर प्रदेश की शांति और समृद्धि की कामना की तथा भारतमाता चौक पर नक्सल हिंसा में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शहीदों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता और यही बलिदान आज शांति की नींव बना है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और सुरक्षा बलों की रणनीतिक कार्यवाही से यह संभव हुआ है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में लिए गए निर्णायक फैसलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे उसी संकल्प शक्ति की कड़ी बताया।
कवर्धा का यह समारोह केवल स्वागत कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस दौर के अंत का प्रतीक बना जब भय और असुरक्षा आम बात थी। अब विकास, निवेश और शिक्षा की नई चर्चा हो रही है। साफ संदेश है — छत्तीसगढ़ बदल चुका है, और यह बदलाव जनता के विश्वास की ताकत से आया है।