कुकदुर थाना क्षेत्र के पोलमी नवापारा से 20 वर्षीय युवती के लापता होने के बाद उसके पिता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। युवती के पिता जेठूराम धुर्वे ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर बेटी की तत्काल तलाश और थाना स्तर पर शिकायत दर्ज नहीं किए जाने की जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, युवती 01 अक्टूबर की शाम किराना सामान खरीदने की बात कहकर घर से निकली थी। इसके बाद वह वापस नहीं लौटी। परिजनों ने आसपास, किराना दुकानों और रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। पिता के मुताबिक युवती मोबाइल फोन लेकर गई थी, जो बाद में बंद बताने लगा। घर में रखे 10 हजार रुपये भी नहीं मिले।
पिता का आरोप है कि 5 अक्टूबर को वह बेटी की गुमशुदगी की सूचना देने कुकदुर थाना पहुंचे, लेकिन उनसे पहले स्कूल संबंधी दस्तावेज लाने को कहा गया। अगले दिन दस्तावेज लेकर पहुंचने के बावजूद शिकायत दर्ज नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। लिखित शिकायत में यह भी कहा गया है कि पुलिसकर्मियों ने एक युवक के पिता से बातचीत कराने की बात कही थी।
परिजनों ने एक युवक पर युवती को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने की आशंका जताई है। हालांकि, यह आशंका फिलहाल शिकायतकर्ता के कथन तक सीमित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। युवती की बरामदगी और उसके बयान के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
कानूनी दृष्टि से, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करने की प्रक्रिया निर्धारित करती है। सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी निर्णय के अनुसार, संज्ञेय अपराध का खुलासा होने पर प्राथमिकी दर्ज करना अनिवार्य है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच और युवती की सुरक्षित तलाश दोनों महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
पुलिस अधीक्षक से थाना कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराने, युवती की तत्काल तलाश करने और तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।