कवर्धा। पंडरिया क्षेत्र में जुए का अवैध कारोबार लंबे समय से जड़ें जमाए हुए है। प्रदेश में सरकार बदलने के बावजूद जुए के अड्डों पर नकेल कसने में प्रशासन विफल रहा है। सत्ता परिवर्तन के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगेगा, परंतु हालात जस के तस बने हुए हैं। अब यह गतिविधि नए स्थानों पर, नगर के प्रभावशाली व्यक्तियों के संरक्षण में फल-फूल रही है।
स्थान बदला, संरक्षक वही
पहले जुए का संचालन पंडरिया-कुकदुर रोड क्षेत्र में होता था, लेकिन अब देवसरा-बकेला रोड में नए अड्डे सक्रिय हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रसूखदारों के संरक्षण में यह गतिविधि निर्बाध रूप से संचालित हो रही है। ऐसे में कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे हैं।
बदलती सरकारें, अपरिवर्तित व्यवस्था
पंडरिया में हाल के वर्षों में विधायक, नगरपालिका और पंचायत प्रतिनिधियों में व्यापक बदलाव हुआ है। बावजूद इसके, जुए का नेटवर्क न केवल बरकरार है बल्कि दिनोंदिन मजबूत होता जा रहा है। प्रशासनिक कार्रवाईयां केवल खानापूर्ति तक सीमित हैं, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
‘हटकी ब्याज’ का जाल, बर्बादी की ओर बढ़ते परिवार
जुए के अड्डों पर भारी ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराने वाले साहूकारों का भी समानांतर नेटवर्क सक्रिय है। ‘हटकी ब्याज’ पर दिए जाने वाले ऋणों के कारण अनेक परिवार कर्ज के दलदल में फंस कर सामाजिक और आर्थिक रूप से तबाह हो रहे हैं। वसूली के लिए दबंगई पूर्ण तरीकों का सहारा लिया जा रहा है, जिससे आमजन में भय का माहौल व्याप्त है।
सामाजिक ताने-बाने पर गंभीर आघात
जुए की बढ़ती प्रवृत्ति ने समाज के मूल ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। युवाओं के बीच बेरोजगारी और अपराध की प्रवृत्ति बढ़ी है। घरेलू हिंसा, तलाक, मानसिक तनाव जैसी सामाजिक समस्याएं भी जुए की वजह से लगातार बढ़ती जा रही हैं। यह स्थिति समाज के समग्र विकास में एक गंभीर बाधा बनती जा रही है।
समाधान के लिए ठोस और सख्त कदम आवश्यक
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, प्रशासन को त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करनी होगी। जुए के अड्डों पर सघन छापेमारी, संरक्षक तत्वों पर कानूनी शिकंजा कसना और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को इस अवैध गतिविधि के दुष्परिणामों से अवगत कराना अनिवार्य है। साथ ही, युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए विशेष योजनाएं प्रारंभ की जानी चाहिए।