सरकारी नौकरी की लालसा में पांडातराई निवासी संतोष देवांगन और उनके परिवार के पांच सदस्य ठगी का शिकार हो गए। यह ठगी वर्ष 2022 में शुरू हुई, जब रायपुर में एक संगठन के पंजीयन के दौरान संतोष की मुलाकात बिशेसर ध्रुव नामक व्यक्ति से हुई। बिशेसर ने खुद को मंत्रालय से जुड़ा बताते हुए लेबर इंस्पेक्टर, शिक्षक और चपरासी की नौकरी दिलाने का झांसा दिया।
बातों में आकर संतोष और उनके परिजनों ने अलग-अलग पदों के लिए कुल ₹37 लाख 67 हजार 900 रुपये बिशेसर और उसके साथी भुवनेश देवांगन को दे दिए। रकम नकद और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से दी गई। बिशेसर ने छह महीने में नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन समय बीतता गया और न तो नौकरी मिली, न पैसा वापस आया।
संदेह होने पर संतोष ने जब राशि लौटाने की मांग की, तो उन्हें फर्जी चेक पकड़ा दिए गए। इसके बाद 27 अप्रैल 2025 को गंडई थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के निर्देश पर बनी टीम ने कार्रवाई करते हुए रायपुर और बलौदाबाजार से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने ठगी की बात कबूल की।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी भुवनेश पहले भी बीजापुर जिले में ₹38 लाख की ठगी में गिरफ्तार हो चुका था और फिलहाल जमानत पर बाहर था। अब दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और पुलिस रैकेट के अन्य पीड़ितों की पहचान में जुटी है।