नगर पंचायत पांडातराई के बिलासपुर रोड पर स्थित शराब दुकान के पास अवैध चखना दुकानें खुलेआम संचालित हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं। यह चुप्पी खुद एक बड़े सवाल को जन्म देती है — क्या जिम्मेदारों तक कमीशन की सांठगांठ ने कार्रवाई को जड़ से रोक दिया है ।
यह शराब दुकान नगर रहवासी सीमा से दूर खेतों के बीच स्थित है, जहाँ पहुंचने के लिए नेशनल हाईवे से होकर नहर और नाली पार करनी पड़ती है। लेकिन यह मार्ग अब कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है। शराब की बोतलों के टुकड़े, झिल्ली, पन्नी और डिस्पोजल सामग्री नहर-नाली में भर गए हैं। इससे आने वाले दिनों में बरसात के मौसम में सिंचाई के लिए गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।
खेती-किसानी पर सीधा असर
शराब दुकान के आस-पास गन्ने की खेती हो रही है और कुछ खाली जमीन पर धान की फसल लगाई जानी है। लेकिन इन खेतों में शराब पीने वाले ग्राहकों द्वारा फेंकी गई पन्नियां, डिस्पोजल और कांच के टुकड़े बिखरे पड़े हैं। इससे न केवल भूमि की उर्वरता प्रभावित होगी, बल्कि फसल को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है। किसान इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
प्राकृतिक संसाधनों की उपेक्षा
नहर-नाली जैसे जलस्रोतों में लगातार कचरा भरने से जल संचयन और वितरण व्यवस्था पर भी खतरा मंडरा रहा है। यदि शीघ्र ही सफाई और निगरानी की ठोस व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले समय में यह समस्या विकराल रूप धारण कर सकती है।
समाज और पर्यावरण दोनों पर दुष्प्रभाव
एक ओर अवैध चखना दुकानों के चलते स्थानीय युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है, तो दूसरी ओर खेतों की उपज पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। यह न केवल एक सामाजिक संकट है, बल्कि पर्यावरण और कृषि व्यवस्था पर भी सीधा प्रहार है।
प्रशासन कब जागेगा
स्थानीय नागरिकों और किसानों की मांग है कि प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे, शराब दुकान के पास अवैध गतिविधियों पर रोक लगाए और नहर-नाली की सफाई कराए। साथ ही यह भी आवश्यक है कि शराब दुकान को खेतों और जलस्रोतों से दूर स्थानांतरित किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।