कवर्धा। कबीरधाम में कस्टम मिलिंग के लिए सरकारी धान उठाने वाली राइस मिलों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गंडईकला स्थित श्री राम राइस मिल की संयुक्त जांच में ऑनलाइन रिकॉर्ड और मौके पर मिले चावल के स्टॉक में 4,554.52 क्विंटल का अंतर सामने आने के बाद प्रशासन ने मिल संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। प्रशासन ने इस कथित अपयोजन से संबंधित धान की मात्रा 6,797 क्विंटल और उसकी अनुमानित कीमत 2 करोड़ 10 लाख 70 हजार 700 रुपये बताई है।
मामला केवल एक मिल तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि यदि सरकारी धान और तैयार चावल के स्टॉक की नियमित निगरानी होती रही, तो इतना बड़ा अंतर जांच से पहले क्यों नहीं पकड़ में आया। क्या विभागीय निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित था या वास्तव में मिल परिसरों में पहुंचकर स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया जाता रहा।
एक मिल पकड़ी गई, बाकी मिलों की निगरानी कौन करेगा
3 अक्टूबर को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बोड़ला के नेतृत्व में राजस्व, खाद्य, पुलिस, नागरिक आपूर्ति निगम, स्टेट वेयर हाउस कॉर्पोरेशन और विपणन संघ की संयुक्त टीम ने मिल की जांच की। नोटिस के अनुसार जांच के दौरान संचालक अनुपस्थित रहीं और मिल परिसर में ताला लगा मिला। कर्मचारियों के पास चाबी नहीं होने के बाद पंचों की मौजूदगी में वीडियोग्राफी करते हुए ताला तोड़कर परिसर की जांच की गई।
भौतिक सत्यापन में स्टेक क्रमांक-1 में 3,426 बोरा मोटा धान, स्टेक क्रमांक-2 में 1,338 बोरा पतला धान, 338 बोरी ब्रोकन राइस और 580 बोरा चावल मिला। इसके अलावा हॉपर में लगभग 3,000 बोरा धान होना बताया गया। प्रशासन के अनुसार कुल उपलब्ध स्टॉक के अनुपातिक आधार पर 5,925.48 क्विंटल चावल पाया गया, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में जमा किया जाना शेष चावल 10,480 क्विंटल प्रदर्शित था।
यहीं से निगरानी तंत्र पर सबसे बड़ा सवाल उठता है।
75 हजार खाली बारदाने भी मिले, अभिलेख गायब
जांच रिपोर्ट के अनुसार मिल परिसर में लगभग 75 हजार खाली जूट बारदाने मिले। वहीं बी-01 पंजी, मासिक विवरणी पंजी और अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए। प्रशासन ने मिल परिसर में मौजूद धान और चावल के स्टॉक को जब्त कर मिल संचालक के प्रतिनिधि की अभिरक्षा में आगामी आदेश तक सुपुर्द किया है।
नोटिस में कस्टम मिलिंग अनुबंध की विभिन्न शर्तों तथा छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 की कई धाराओं के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया उल्लेख करते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत कार्रवाई का आधार बताया गया है।
सवाल मिलर से ज्यादा सिस्टम से
मिल संचालक को जारी नोटिस में जब्त सामग्री राजसात करने, कथित अपयोजित धान की राशि वसूलने, बैंक गारंटी राजसात करने, तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने और अभियोजन की कार्रवाई पर जवाब मांगा गया है। अंतिम कार्रवाई संचालक के जवाब और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी विभागीय निगरानी तंत्र की भी तय होनी चाहिए। आखिर सरकारी धान मिल तक पहुंचने के बाद उसके स्टॉक का नियमित मिलान किसने किया। ऑनलाइन रिकॉर्ड में 10,480 क्विंटल चावल और मौके पर 5,925.48 क्विंटल चावल के बीच इतना बड़ा अंतर बना रहा तो संबंधित निरीक्षण व्यवस्था को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।
सिर्फ एक मिल पर कार्रवाई क्यों, पूरे जिले का विशेष ऑडिट हो
एक मिल में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद केवल उसी मिल के खिलाफ कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। कबीरधाम जिले की सभी अनुबंधित राइस मिलों का एक साथ भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। उठाए गए धान, मिलिंग क्षमता, तैयार चावल, ऑनलाइन रिकॉर्ड, वास्तविक स्टॉक, बारदाने और संबंधित अभिलेखों का मिलान होना चाहिए।
जिले के किसी मिलर को बिना जांच दोषी ठहराना उचित नहीं, लेकिन यह मान लेना भी उचित नहीं कि गड़बड़ी की संभावना केवल एक मिल तक सीमित है। यदि जिले की सभी मिलों में नियमित और प्रभावी निगरानी हुई है तो विशेष जांच में स्थिति स्वतः साफ हो जाएगी।
अब सवाल यह नहीं है कि एक मिल में कितना स्टॉक कम मिला। सवाल यह है कि सरकारी धान की करोड़ों रुपये की व्यवस्था में निगरानी आखिर कितनी मजबूत है। यदि जिम्मेदार विभाग नियमित निरीक्षण और वास्तविक भौतिक सत्यापन करते तो इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आने के लिए विशेष संयुक्त टीम और ताला तोड़कर जांच की नौबत क्यों आती।
सरकार को अब एक मिल की कार्रवाई से आगे बढ़कर पूरे जिले की कस्टम मिलिंग व्यवस्था का विशेष ऑडिट कराना चाहिए और जहां भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, वहां मिलर के साथ संबंधित जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय करनी चाहिए। यही कार्रवाई सरकारी धान और सार्वजनिक धन के संरक्षण के प्रति प्रशासन की वास्तविक गंभीरता साबित करेगी।