प्रदेश के राजस्व मंत्री के विधानसभा क्षेत्र अर्जुनी स्थित आत्मानंद स्कूल में चल रहे रिश्वत के खेल का सच उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल पहुंचकर जांच की, जहां खबरों में उजागर वसूली का मामला सही पाया गया। जांच के बाद प्राचार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है।
प्राचार्य की संलिप्तता सामने आने के बाद भी पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं होने से आक्रोश बढ़ रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों का कहना है कि केवल निलंबन का प्रस्ताव भेजना पर्याप्त नहीं है — प्राचार्य और जनभागीदारी अध्यक्ष चित रेखा साहू दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार और ठगी की धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
गौरतलब है कि समोसा बेचने वाली निर्धन मां प्रतिमा गौड़ समेत कई गरीब अभिभावकों ने रिश्वत देने की पीड़ा को सार्वजनिक किया था। प्राचार्य और जनभागीदारी अध्यक्ष पर सीटें बेचने का आरोप प्रमाणित हो चुका है, फिर भी कार्रवाई सिर्फ विभागीय स्तर पर सीमित है।
जनता का सवाल : रिश्वतखोरों पर केस कब
शिक्षा के मंदिर में मासूम बच्चों का भविष्य गिरवी रखने वालों पर पुलिस कार्रवाई कब होगी — यह सवाल अब हर गरीब अभिभावक पूछ रहा है। लोगों का कहना है कि आत्मानंद स्कूल जैसे संस्थानों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई अनिवार्य है, नहीं तो प्रदेश के गरीब बच्चों का भविष्य ऐसे ही बिकता रहेगा।
अब निगाहें शासन-प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा।