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नमक और कनकी में खरीद रहे है मध्यप्रदेश के व्यापारी चार चिरौंजी

 कार्यवाही का आभाव
कवर्धा , वन मंडल कबीरधाम के जंगलों में इन दिनों चार के पेड़ फल से लदे हुए हैं. चार फल से निकलने वाले बीज को चिरौंजी कहा जाता है, जिसकी खरीदी के लिए वन विभाग द्वारा समिती बनाया गया है और सरकार के द्वारा समर्थन मूल्य भी निर्धारित किया गया है जिसमे चिरौजी को अलग अलग ग्रेड में विभाजित कर मूल्य निर्धारित किया गया है लेकिन ग्रामीण चिरौंजी के बजाय चार गुठली को ही व्यापारियों के पास औने-पौने दाम पर विक्रय करते हैं. हालांकि वन विभाग भी समर्थन मूल्य घोषित कर चिरौंजी गुठली की खरीदी करता है, पर इसके पहले ही कोचिया गांवों में पहुंचकर खरीदी कर लेते हैं. इससे ग्रामीणों को चिरौंजी गुठली की सही दाम नहीं मिल पाते है साथ ही ग्रामीण हरे भरे चार के पेड़ो को भी काट रहे हैं जिस पर विभाग कार्यवाही नहीं रहे हैं।
 औषधी गुणों से भरपूर है चिरौंजी
औषधीय गुणों से भरपूर चिरौंजी का उपयोग मेवा के रुप में होता है. इन दिनों कबीरधाम वन मंडल के ग्रामीण क्षेत्र में लगने वाले साप्ताहिक हाट बाजारों में ग्रामीण महिलाएं चार पाक को दोनी में बिक रहीं है, और प्रति दोनी 10 ,15 रूपए में बिकता है. वहीं चार के कच्चे फल को तोड़ने के बाद उसे सूखा लेते हैं, और सूखा चार फल को व्यापारी खरीदी करने घर तक पहुंचते हैं ।
कनकी और नमक के बदले खरीदते है मध्यप्रदेश के व्यापारी 
तरेगाव , दलदली, चिल्फी कुकदुर सहित वनांचल के ग्रामीण चावल के छोटे छोटे टुकड़े (कनकी) , नमक के बदले चिरौंजी को बेचते है , जिसकी जानकारी वन विभाग को भी है लेकिन उन्हें मना नहीं करते न ही कोई ठोस कार्यवाही कार्यवाही करते । झलमला, दलदली, रेंगाखर, समनापुर साहित अनेक साप्ताहिक बाजार के दिन छत्तीसगढ के अलावा पड़ोसी राज्य के व्यापारियों के द्वारा गांव गांव में घूमकर छोटी वाहन से खरीदी करते हैं साथ ही साप्ताहिक हाट बाजार में पसरा भी लगाते हैं बावजूद विभाग देखकर अनदेखा करता है ।
समर्थन मूल्य निर्धारीत बावजूद कोचिया सक्रिय 
वन मंडल अधिकारी शशि कुमार ने छत्तीसगढ सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य का प्रचार प्रसार करने की जिम्मेदारी प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति को दिया गया है और खरीदी की गई चार चिरौंजी की भुगतान आनलाइन सुविधाएं से तीन दिवस के भीतर करने का निर्देश दिया गया है लेकिन वनवासी सरकार के समर्थन मूल्य में चिरौंजी की खरीदी होते है और व्यापारी कच्चे चार को खरीद रहे जिसके चलते कम दामों में बेच रहे हैं जबकि समर्थन मूल्य ग्रेड-1, 350 रू. प्रति कि.ग्रा. – न्यूनतम 20.10 से 25 कि.ग्रा. चिरौंजी दाना प्रति क्विं. चिरौंजी गुठली प्राप्त हो। ग्रेड-2, 270 रू. प्रति कि.ग्रा. – न्यूनतम 15.10 से 20 कि.ग्रा. चिरौंजी दाना प्रति क्विं. चिरौंजी गुठली प्राप्त हो। ग्रेड-3, 190 रू. प्रति कि.ग्रा. – न्यूनतम 10.00 से 15 कि.ग्रा. चिरौंजी दाना प्रति क्विं. चिरौंजी गुठली प्राप्त हो साथ ही नमी की मात्रा 12 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
चार पेड़ो की लगातार कटाई 
वन मंडल के सभी वन परिक्षेत्र में जहा पर चार पेड़ उपलब्ध है वहा पर चार चिरौंजी के लिए सीधा पेड़ो को ही काट दिया जा रहा है। जिसके चलते चार के पेड़ की संख्या में लगातार कमी हो रहा है। जिसकी जानकारी विभागीय अमला को भी पता है बावजूद रोकने का नाम नहीं ले रहे है जो समझ से परे है जबकि वन मंडल अधिकारी ने अवैध कटाई पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश अधीनस्थ कर्मचारियों को दिए है ।
अनुपयोगी दिखाई दे रहा हाई टेक बैरियल
वन विभाग के द्वारा भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र और सामान्य वन परिक्षेत्र के वनांचल ग्राम झलमला में हाई टेक बैरियल लगाया है जहा से छत्तीसगढ ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के व्यापारी बे रोक टोक वनोपज की परिवहन करते दिखाई देते हैं। रविवार को साप्ताहिक हाट बाजार लगता है जहां पर मध्यप्रदेश के पचास प्रतिशत लोग आते है और व्यापारी आसपास के गावों में छोटे बड़े वाहनों से वनोपज की खरीदी कर परिवहन करते हैं वावजूद कोई कार्यवाही नहीं होता । खानापूर्ति के स्थानीय छोटे छोटे कोचियो के ऊपर कार्यवाही करने का धौंस दिखाया जाता है। ।

 

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