मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और परिणाम आधारित कार्यशैली का असर अब राज्य प्रशासनिक व्यवस्था में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। शिक्षा व्यवस्था में गिरावट और लापरवाही को लेकर सरकार अब एक्शन मोड में आ गई है। इसी कड़ी में स्कूल शिक्षा विभाग ने महासमुंद जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को उनके पद से हटाते हुए नया पदस्थापन आदेश जारी किया है।
लापरवाही पर कार्रवाई, नई जिम्मेदारी सौंपी
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, महासमुंद जिले के प्रभारी डीईओ प्राचार्य एम.आर. सावंत को उनके पद से हटाकर अब कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा विभाग, जगदलपुर में सहायक संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। उनकी जगह पर नवागढ़ (जांजगीर-चांपा) के विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्राचार्य विजय कुमार लहरे को महासमुंद का नया प्रभारी डीईओ नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही भूपेंद्र कुमार कौशिक को नवागढ़ विकासखंड का नया विकासखंड शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है।
खराब परीक्षा परिणाम बनी मुख्य वजह
यह तबादला उस समय किया गया है जब हाल ही में आयोजित सुशासन तिहार के तीसरे चरण के अंतर्गत मुख्यमंत्री साय ने महासमुंद जिले में शिक्षा की समीक्षा बैठक ली थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने बोर्ड परीक्षा के कमजोर प्रदर्शन पर नाराजगी जताई थी और शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही के लिए जिला अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया था।
2024 की तुलना में 2025 में महासमुंद जिले में दसवीं और बारहवीं दोनों बोर्ड परीक्षाओं में परिणामों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
वर्ष 2024 में कक्षा दसवीं का परिणाम 84.17% था, जो 2025 में घटकर 78.33% रह गया।
बारहवीं का परिणाम 2024 में 91.61% था, जो 2025 में गिरकर 84.08% हो गया।
मुख्यमंत्री ने दी थी सख्त चेतावनी
मुख्यमंत्री साय ने समीक्षा बैठक में स्पष्ट तौर पर कहा था कि शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जो अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों में लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी दिशा में यह तबादला एक कड़ा संदेश है कि सरकार अब केवल परिणाम देखेगी, और प्रदर्शन के आधार पर ही जिम्मेदारियां दी जाएंगी।
परिणाम आधारित शासन की ओर कदम
स्कूल शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई स्पष्ट करती है कि मुख्यमंत्री साय की सरकार न केवल जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में ठोस और सख्त कदम उठा रही है। यह कदम न सिर्फ शिक्षा अधिकारियों को चेतावनी है, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक निर्णायक पहल भी है।