जिले की नवपदस्थ कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति ने शुक्रवार को पदभार ग्रहण कर लिया। वर्ष 2016 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी तुलिका प्रजापति जिले की 21वीं कलेक्टर हैं। प्रशासनिक अनुभव से समृद्ध नई कलेक्टर के सामने अब कबीरधाम जैसे राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण जिले की कमान संभालने की चुनौती है।
कलेक्टर का पद किसी भी जिले में महज प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आम जनता की उम्मीदों का केंद्र होता है। कबीरधाम में भी लोगों को नई कलेक्टर से यही उम्मीद है कि वर्षों से लंबित समस्याओं पर गंभीरता से सुनवाई होगी, सरकारी दफ्तरों में आम लोगों की पहुंच आसान होगी और प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही दिखाई देगी। ऐसे में तुलिका प्रजापति के सामने चुनौती सिर्फ कार्यालय संभालने की नहीं, बल्कि जनता के भरोसे पर खरा उतरने की भी है।
कबीरधाम में दो विधानसभा क्षेत्र हैं। पंडरिया विधानसभा का प्रतिनिधित्व विधायक भावना बोहरा करती हैं, जबकि कवर्धा विधानसभा से उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा विधायक हैं। जिले में दो सांसदों के साथ दो मंत्री दर्जा प्राप्त जनप्रतिनिधि, विधानसभा अध्यक्ष और अन्य प्रभावशाली राजनीतिक एवं सामाजिक प्रतिनिधियों की भी सक्रिय भूमिका है। ऐसे माहौल में जिला प्रशासन के मुखिया के रूप में कलेक्टर के लिए प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना आसान नहीं माना जाता।
कबीरधाम में विकास कार्यों से लेकर कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, राजस्व, पंचायत और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं लगातार प्रशासन के सामने आती रही हैं। आम नागरिकों की नजर अब इस बात पर होगी कि नई कलेक्टर इन मुद्दों को किस प्राथमिकता से लेती हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक कितनी तेजी से पहुंचता है।
तुलिका प्रजापति इससे पहले मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की कलेक्टर रह चुकी हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक और पशुपालन विभाग की उप सचिव के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई है। इसके अलावा बेमेतरा, बलरामपुर और कोरिया जिले में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में काम करने का अनुभव भी उनके प्रशासनिक खाते में है।
अब अनुभव की यह परीक्षा कबीरधाम में होगी। राजनीतिक रूप से सक्रिय जिले में प्रशासनिक निष्पक्षता, कानून का समान रूप से पालन और जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी कसौटी होगी। कलेक्टर की कुर्सी पर बैठते ही उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि वे प्रशासनिक दबावों और जनप्रतिनिधियों की अपेक्षाओं के बीच आम जनता की उम्मीदों को कितनी मजबूती से प्राथमिकता दे पाती हैं।
कबीरधाम की जनता अब नई कलेक्टर के कार्यकाल की शुरुआत को उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। पदभार ग्रहण हो चुका है, अब असली परीक्षा फैसलों और उनके जमीन पर दिखाई देने वाले असर की होगी।